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नीतीश की तस्वीर हटने पर भड़की रोहिणी आचार्य, बोलीं—‘यह घोर बेइज्जती’, बीजेपी पर साधा निशाना
- Reporter 12
- 15 Apr, 2026
बिहार में सत्ता परिवर्तन के बाद नीतीश कुमार की तस्वीर हटाए जाने पर रोहिणी आचार्य ने बीजेपी पर तीखा हमला बोला। इसे ‘घोर बेइज्जती’ बताते हुए कई सवाल उठाए।
पटना/आलम की खबर:बिहार में सत्ता परिवर्तन के साथ ही राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और नए समीकरणों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है। इसी कड़ी में राष्ट्रीय जनता दल से जुड़ी नेता रोहिणी आचार्य ने एक बार फिर सियासी तापमान बढ़ा दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तस्वीर सरकारी विज्ञापनों और पोस्टरों से हटाए जाने को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है और इसे ‘घोर बेइज्जती’ करार दिया है। उनके इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है और इसे सत्ता परिवर्तन के बाद बदलते राजनीतिक व्यवहार के रूप में देखा जा रहा है।
दरअसल, सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई सरकार के गठन के बीच एक सरकारी विज्ञापन से नीतीश कुमार की तस्वीर गायब होने का मुद्दा सामने आया, जिसे लेकर विपक्ष ने सवाल उठाने शुरू कर दिए। रोहिणी आचार्य ने इसी मुद्दे को आधार बनाते हुए बीजेपी और नई सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि अभी नीतीश कुमार के इस्तीफे को 24 घंटे भी पूरे नहीं हुए हैं और उनकी तस्वीर सरकारी प्रचार सामग्री से हटा दी गई है, जो यह दर्शाता है कि सत्ता बदलते ही पुराने सहयोगियों के साथ कैसा व्यवहार किया जा रहा है।
उन्होंने अपने बयान में यह भी कहा कि जब तक नीतीश कुमार सत्ता में थे, तब तक बीजेपी उन्हें नाराज करने से बचती रही और उन्हें अपने साथ प्रमुखता से दिखाती रही, लेकिन जैसे ही उन्होंने पद छोड़ा, वही लोग अब उनसे दूरी बनाने लगे हैं। रोहिणी आचार्य ने इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक स्वार्थ से जोड़ते हुए कहा कि यह व्यवहार न केवल असम्मानजनक है, बल्कि यह दर्शाता है कि सत्ता की राजनीति में रिश्तों का कोई स्थायी मूल्य नहीं रह गया है।
रोहिणी आचार्य ने अपनी प्रतिक्रिया में एक प्रसिद्ध कहावत का जिक्र करते हुए कहा कि नीतीश कुमार की स्थिति अब ऐसी हो गई है, जहां वे न पूरी तरह सत्ता में हैं और न ही पूरी तरह स्वतंत्र भूमिका में। उन्होंने इसे ‘कैच-22’ जैसी स्थिति बताते हुए कहा कि यह एक ऐसी परिस्थिति है, जहां से निकलना बेहद कठिन होता है। उनके अनुसार, नीतीश कुमार ने जिस भरोसे के साथ सत्ता का हस्तांतरण किया, उसके बदले उन्हें अपेक्षित सम्मान नहीं मिल रहा है।
इससे पहले भी रोहिणी आचार्य नई सरकार को लेकर अपने बयानों के कारण चर्चा में रही हैं। उन्होंने हाल ही में एक अन्य पोस्ट में बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा था कि पार्टी को मुख्यमंत्री बनाने के लिए एक ‘घुमंतू चेहरा’ मिला है, जिसे राजनीतिक हलकों में सम्राट चौधरी पर कटाक्ष के रूप में देखा गया। उनके इन बयानों से साफ है कि विपक्ष नई सरकार पर लगातार हमलावर रुख अपनाए हुए है और हर मुद्दे को राजनीतिक रूप से भुनाने की कोशिश कर रहा है।
वहीं, रोहिणी आचार्य ने बीजेपी की राजनीतिक रणनीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पार्टी लंबे समय से बिहार में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है, लेकिन अब तक वह अपने दम पर सरकार बनाने या स्थायी नेतृत्व स्थापित करने में पूरी तरह सफल नहीं हो पाई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी गठबंधन की राजनीति के सहारे आगे बढ़ती रही है और अब जब उसे सत्ता का नेतृत्व मिला है, तो वह अपने सहयोगियों को नजरअंदाज कर रही है।
इस पूरे विवाद ने बिहार की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। एक तरफ विपक्ष इसे सम्मान और राजनीतिक नैतिकता का मुद्दा बना रहा है, वहीं दूसरी ओर सत्ता पक्ष की ओर से अभी तक इस पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान आने वाले समय में और तीखे हो सकते हैं, क्योंकि नई सरकार के गठन के साथ ही राजनीतिक ध्रुवीकरण भी बढ़ता नजर आ रहा है।
गौरतलब है कि बिहार में हालिया सत्ता परिवर्तन के बाद राजनीतिक समीकरण तेजी से बदले हैं और पुराने गठबंधनों की जगह नए समीकरण बन रहे हैं। ऐसे में इस तरह के विवाद यह संकेत देते हैं कि आने वाले दिनों में सियासी टकराव और बढ़ सकता है। रोहिणी आचार्य का यह बयान भी उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है, जहां विपक्ष सरकार को हर मुद्दे पर घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है।
कुल मिलाकर, नीतीश कुमार की तस्वीर हटाए जाने को लेकर शुरू हुआ यह विवाद केवल एक पोस्टर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सत्ता परिवर्तन के बाद बदलते राजनीतिक व्यवहार और रिश्तों की नई परिभाषा को भी उजागर करता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या यह विवाद आगे और गहराता है या समय के साथ शांत हो जाता है।
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